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कुरुड़ और देवराड़ा को यात्रा के मानचित्र पर अंकित करें सरकार

उत्तराखंड

कुरुड़ और देवराड़ा को यात्रा के मानचित्र पर अंकित करें सरकार

मां नन्दा राजराजेश्वरी सिद्धपीठ कुरुड़ मन्दिर बड़ी जात (नन्दा राजजात) आयोजन समिति ने कुरुड़ और देवराड़ा को राजजात यात्रा के मानचित्र में अंकित करने की सरकार से मांग की है।

इस सम्बन्ध मे समिति के प्रतिनिधिमंडल दल ने माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी,पर्यटन मंत्री श्रीमान सतपाल महाराज जी और प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट जी से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल दल ने बताया कि नंदादेवी राजजात यात्रा में राजा के प्रतिनिधि कांसुवा के कुंवर लोग इस परंपरा के तहत कुल देवी नंदादेवी सिद्धपीठ कुरुड़ को नंद केसरी में अपनी पूजा और मनौती भेंट करते हैं। कुरुड़ व बधाण के पुजारियों के हाथों से पूजा अर्चना होती है। जो की एक पौराणिक परंपरा है। प्रतिवर्ष नंदा देवी राजराजेश्वरी सिद्ध पीठ कुरुड़ से छोटी जात व 12 वर्ष बाद राजजात का आयोजन होता है।

हिमालय महाकुंभ की तर्ज पर होने वाले बड़ी जात (राजजात यात्रा) में राजा की कुलदेवी सिद्धपीठ कुरुड़ व देवराडा को मुख्य पड़ाव व राजजात के मानचित्र पर अंकित नहीं किया गया है। इसलिए इन पड़ावों को भी बड़ी जात (राजजात यात्रा) मानचित्र में शामिल किया जाए।

साथ ही साथ लार्ड कर्जन पथ को नन्दा राजराजेश्वरी पथ घोषित करने के पक्ष में बात हुई।मुख्यमंत्री जी और पर्यटन मंत्री महाराज ने पूरे मामले का परीक्षण करने के बाद समाधान करने का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल दल में धनीराम गौड़, प्रकाश चंद गौड़, जनार्दन प्रसाद गौड़, राकेश चंद्र गौड़, अशोक प्रसाद गौड़, विपुल मैंदोली, जगत सिंह नेगी, रणजीत सिंह,रघुनाथ फरस्वाण, सुनील कोठियाल, मनीष नेगी, दीपक पंत,गंभीर रावत, सुरजीत बिष्ट, दलबीर बिष्ट, लक्ष्मण नेगी इत्यादि शामिल थे।

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