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भूमि धोखाधड़ी पर प्रशासन सख्त, 51 मामलों का निस्तारण और 5 में एफआईआर के निर्देश…

उत्तराखंड

भूमि धोखाधड़ी पर प्रशासन सख्त, 51 मामलों का निस्तारण और 5 में एफआईआर के निर्देश…

देहरादून 6 अप्रैल।

मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भूमि धोखाधड़ी के मामलों पर प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सोमवार को गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पाण्डेय की अध्यक्षता में सर्वे चौक स्थित कैंप कार्यालय में लैंड फ्रॉड समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें भूमि धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई।

बैठक में पूर्व बैठक के निर्देशों के अनुपालन में प्राप्त आख्या पर चर्चा करते हुए समिति ने 11 लंबित मामलों और 51 नई शिकायतों पर सुनवाई की। समीक्षा के दौरान कुल 51 मामलों का निस्तारण किया गया, जबकि 5 मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए।

आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि भूमि धोखाधड़ी के मामलों को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिन मामलों में संयुक्त निरीक्षण आवश्यक है, उन्हें इसी सप्ताह पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने तहसील स्तर से प्राप्त रिपोर्टों की गहन जांच पर भी जोर दिया और कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विवाद पाए जाने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होंगे।

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सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करने और पुलिस द्वारा प्रभावी जांच सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। आयुक्त ने कहा कि भूमि धोखाधड़ी के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए। जिन मामलों में स्पष्ट रूप से धोखाधड़ी सामने आती है, उनमें विशेष जांच दल से जांच कराने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक के दौरान उपजिलाधिकारी सदर और उपजिलाधिकारी ऋषिकेश की अनुपस्थिति पर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त करते हुए उनसे स्पष्टीकरण तलब करने के निर्देश दिए। वहीं एक प्रकरण में तहसीलदार द्वारा आवश्यक जानकारी प्रस्तुत न किए जाने पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए तहसीलदार को तत्काल ऋषिकेश जाकर एक घंटे के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में कुछ चौंकाने वाले मामले भी सामने आए। एक प्रकरण में राजस्थान के कुछ व्यक्तियों द्वारा रुद्रप्रयाग में आवासीय उद्देश्य से खरीदी गई भूमि पर होटल निर्माण कर उसे आगे बेचने तथा बाद में ऋषिकेश में भी भूमि क्रय-विक्रय करने का मामला सामने आया। विधिक परीक्षण में उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम की धारा 154 के उल्लंघन की पुष्टि होने पर संबंधित भूमि को सरकार में निहित करने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

इसी तरह देहराखास क्षेत्र के एक मामले में विधिक राय के बाद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। बैठक में ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें भूमाफिया ने एक ही खसरे की भूमि दो अलग-अलग व्यक्तियों को बेचने या अन्य स्थान की भूमि पर कब्जा दिलाने जैसी अनियमितताएं की थीं। इन मामलों में भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जबकि कुछ शिकायतें जांच के बाद निराधार पाए जाने पर बंद कर दी गईं।

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समीक्षा में बताया गया कि भूमि धोखाधड़ी के कुल 170 मामलों में से अब तक 77 मामलों की सुनवाई हो चुकी है, जिनमें 51 का निस्तारण किया जा चुका है। शेष मामलों में एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की गई है और 15 दिनों बाद फिर से बैठक कर प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

बैठक में राजीव स्वरूप , अपर आयुक्त उत्तम सिंह चौहान, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) जया बलूनी, डीजीसी नितिन वशिष्ठ, उपजिलाधिकारी डोईवाला अपर्णा ढौंडियाल, उपजिलाधिकारी मुख्यालय कुमकुम जोशी, उपजिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार सहित विभिन्न तहसीलों के अधिकारी और तहसीलदार उपस्थित रहे।

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